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दिल्ली NCR में डिलीवरी पार्टनर की कमाई और इंसेंटिव कैसे मिलते हैं

ज़्यादातर डिलीवरी कंपनियों में हर पूरे किए ऑर्डर का पैसा मिलता है, और पेमेंट आम तौर पर हर हफ़्ते बैंक में आता है। इंसेंटिव से कमाई बढ़ती है, और पेनल्टी, फ़ीस और पेट्रोल से घटती है। यहाँ पढ़ें कि ये सब कैसे चलता है: कंपनियाँ खुद क्या बताती हैं, और दिल्ली में रिपोर्टरों ने क्या देखा।

पेड़ के नीचे खड़ी मोटरसाइकिल पर बैठा डिलीवरी राइडर फ़ोन पर पेमेंट ऐप देखकर मुस्कुरा रहा है

कमाई किस हिसाब से बनती है

डिलीवरी के काम में ज़्यादातर कोई तय महीने की सैलरी नहीं होती। जितना काम पूरा करेंगे, उतना पैसा बनेगा।

  • हर ऑर्डर या डिलीवरी का पैसा: Swiggy, Zomato, Blinkit, Swiggy Instamart, Shadowfax और XpressBees हर पूरी की गई डिलीवरी का पेमेंट देते हैं। ऑर्डर ज़्यादा, तो कमाई ज़्यादा।
  • हर काम का अलग हिसाब: Zepto कहता है कि हर काम की फ़ीस दूरी, लगे समय, डिमांड, ट्रैफ़िक, मौसम और कस्टमर रेटिंग से तय होती है। कस्टमर की टिप पूरी आपको मिलती है।
  • समय के ब्लॉक: Amazon Flex और Amazon Now में ऐप से 'ब्लॉक' बुक करते हैं, और हर ऑफ़र में अनुमानित कमाई दिखती है। Amazon Now का ब्लॉक आम तौर पर 4 घंटे का होता है, और दो डिलीवरी के बीच इंतज़ार का पैसा ब्लॉक की मिनिमम पे में जुड़ता है।
  • हर राइड का किराया: Rapido और Uber Moto में हर राइड का किराया आपकी कमाई है।

मतलब, आपका शहर, आपके घंटे और कितने ऑर्डर आपने पूरे किए, इन्हीं से कमाई तय होती है।

पैसा बैंक में कब आता है

ज़्यादातर जगह पेमेंट हफ़्ते में एक बार आता है। Swiggy, Zomato, Blinkit, Swiggy Instamart, Shadowfax, XpressBees और Porter, सब हफ़्ते का पेमेंट बताते हैं। Delhivery सोमवार से रविवार तक के काम का बिल बनाकर पैसा बैंक खाते में भेजता है।

कुछ कंपनियों में तरीका अलग है:

  • Amazon Flex और Amazon Now में पैसा आपके चुने हुए दिनों पर आता है, जल्दी से जल्दी अगले ही दिन।
  • Rapido में किराया पहले Captain वॉलेट में जुड़ता है, वहाँ से आप बैंक में निकालते हैं।
  • Zepto टैक्स काटकर हर हफ़्ते (या तय समय पर) पेमेंट देता है। किसी वेंडर के ज़रिये जुड़े हैं, तो पैसा वह वेंडर भी दे सकता है।

हर कंपनी को आपके नाम का बैंक खाता चाहिए। अप्लाई करने से पहले खाता तैयार रखें।

इंसेंटिव और बोनस: ऊपर की कमाई, तय नहीं

इंसेंटिव वो पैसा है जो ऑर्डर की कमाई के ऊपर मिलता है। हर कंपनी इसे अपने तरीके से देती है:

  • Blinkit: सामान के वज़न और दूरी के हिसाब से इंसेंटिव, साथ में जॉइनिंग बोनस और रेफ़रल बोनस।
  • Shadowfax: बेस पे के ऊपर दूरी का बोनस, पीक-आवर इंसेंटिव और परफ़ॉर्मेंस बोनस।
  • XpressBees: इंसेंटिव, पीक-आवर बोनस, जॉइनिंग बोनस और रेफ़रल इनाम।
  • Zomato: तय समय में कुछ ऑर्डर पूरे करने पर स्टार्टिंग बोनस, और रेफ़रल बोनस। दोनों शहर के हिसाब से बदलते हैं।
  • Delhivery: समय पर डिलीवरी करने पर अलग से इंसेंटिव।
  • Flipkart: त्योहार के सीज़न में बोनस और रेफ़रल इंसेंटिव।

इंसेंटिव कई बार छोटा होता है। मई 2026 में The Wire के रिपोर्टरों ने दक्षिण दिल्ली में खुद डिलीवरी करके देखी। Zepto ऐप पर दो ऑर्डर के ₹94 दिखे, जिसमें ₹20 का सर्ज था। Blinkit पर दो ऑर्डर के ₹35 और ऊपर से ₹22 का जॉइनिंग इंसेंटिव दिखा। ये एक दिन के रिपोर्ट किए गए उदाहरण हैं, कोई तय रेट नहीं।

हाथ में आने वाली कमाई कहाँ कट सकती है

ऐप में जो रकम दिखे, ज़रूरी नहीं कि पूरी आपके पास रहे। इन बातों पर नज़र रखें:

  • पेनल्टी: दिल्ली में Indian Express के एक रिपोर्टर ने Swiggy पर एक ऑर्डर मना किया, और उस दिन की कमाई से ₹30 कट गए।
  • ऑनबोर्डिंग फ़ीस: Swiggy के मुताबिक उसकी ऑनबोर्डिंग फ़ीस लगभग ₹1,500 है, जो जुड़ने के बाद किस्तों में कटती है। Swiggy Instamart, Zomato और Zepto भी कहते हैं कि फ़ीस कमाई से कट सकती है। पूरी जानकारी हमारी जॉइनिंग फ़ीस गाइड में है।
  • गाड़ी का खर्च: पेट्रोल और बाइक का रखरखाव ज़्यादातर आपकी जेब से जाता है। XpressBees और Zepto ये साफ़ लिखते हैं।
  • जल्दी काम छोड़ना: Amazon Now में ब्लॉक बीच में खत्म करने पर उस ब्लॉक का पैसा कम हो जाता है।
  • टैक्स (TDS): पेमेंट से TDS कट सकता है। ज़्यादा कट गया हो तो इनकम टैक्स रिटर्न भरकर वापस मिल सकता है। इसका तरीका इसी पेज के सवाल-जवाब में है।

पहले कुछ हफ़्ते अपने ऑर्डर और पेमेंट एक कॉपी या फ़ोन में लिखते रहें। तब पता चलेगा कि खर्च निकालकर असल में कितना बचता है।

काम शुरू करने से पहले ये पूछ लें

जब कोई कंपनी या हमारी टीम आपसे ओपनिंग की बात करे, तो ये सवाल ज़रूर पूछें:

  1. पैसा हर ऑर्डर पर मिलेगा, ब्लॉक पर या हर राइड पर?
  2. हफ़्ते में किस दिन पेमेंट आएगा?
  3. अभी कौन से इंसेंटिव चल रहे हैं, और उनके लिए क्या करना होगा?
  4. ऑर्डर मना करने या जल्दी लॉग-ऑफ़ करने पर पैसा कटेगा?
  5. कोई ऑनबोर्डिंग फ़ीस या डिपॉज़िट है? कितना है, और क्या कमाई से कटेगा?
  6. पेट्रोल या किराये की गाड़ी का खर्च कौन देगा?

इनके साफ़ जवाब किसी एक कमाई के आंकड़े से ज़्यादा काम के हैं।

आगे क्या करें

अपने इलाके की ओपनिंग के बारे में बात करनी है? हमारा फ़ॉर्म भरें, हमारी टीम आपको कॉल करेगी। दिल्ली NCR की डिलीवरी जॉब की अपडेट पाएँ, इसी फ़ॉर्म से।

लोग अक्सर पूछते हैं

ऑर्डर मना करने पर क्या कमाई से पैसे कट सकते हैं?
हां, ऐसा हो सकता है। जनवरी 2026 में Indian Express के एक रिपोर्टर ने दिल्ली में खुद डिलीवरी का काम किया। Swiggy ऐप में एक ऑर्डर मना करते ही उस दिन की कमाई से ₹30 कुछ ही सेकंड में कट गए। काम शुरू करने से पहले पूछ लें कि उस प्लेटफ़ॉर्म पर पेनल्टी कैसे लगती है।
सर्ज पेमेंट और जॉइनिंग इंसेंटिव असल में कितने मिलते हैं?
ये ऑर्डर की कमाई के ऊपर मिलने वाली एक्स्ट्रा रकम होती है, और कई बार छोटी होती है। The Wire ने मई 2026 में दक्षिण दिल्ली में टेस्ट डिलीवरी करके बताया: कालकाजी में Zepto ऐप पर दो ऑर्डर के ₹94 दिखे, जिसमें ₹20 का सर्ज शामिल था। पूरे काम के दौरान रिपोर्टरों को बस यही एक इंसेंटिव मिला। लाजपत नगर में Blinkit पर दो ऑर्डर के ₹35 और साथ में ₹22 का "जॉइनिंग इंसेंटिव" दिखा। Blinkit के एक राइडर ने बताया कि रात में इंसेंटिव ज़्यादा और दिन में कम मिलता है। ये सिर्फ़ रिपोर्ट किए गए उदाहरण हैं, तय रेट नहीं।
क्या मेरे पेमेंट से टैक्स (TDS) कटता है, और क्या वह वापस मिल सकता है?
डिलीवरी पार्टनर को मिलने वाले पेमेंट से TDS कट सकता है, लेकिन जितना TDS कटा, ज़रूरी नहीं कि उतना टैक्स आपको सच में देना हो। अगर ज़्यादा कट गया है, तो वह पैसा सिर्फ़ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरकर ही वापस मिलता है। Outlook Money के मुताबिक सितंबर 2026 तक Zomato और Blinkit के 2.10 लाख से ज़्यादा डिलीवरी पार्टनर्स ने इन दोनों प्लेटफ़ॉर्म की सुविधा से 2025-26 का रिटर्न भरा और कुल ₹33.6 करोड़ का रिफ़ंड पाया। रिटर्न भरने से पहले Form 26AS और AIS में अपनी कमाई और TDS मिला लें। इनकम टैक्स विभाग रिफ़ंड तभी शुरू करता है जब आप रिटर्न को ई-वेरिफ़ाई कर दें; पैसा आने में आमतौर पर 4-5 हफ़्ते लगते हैं। PAN आधार से लिंक होना चाहिए, और बैंक खाता पहले से वैलिडेट होना चाहिए, जिसमें नाम PAN जैसा ही हो।
क्या डिलीवरी की कमाई पर इनकम टैक्स देना पड़ता है?
डिलीवरी की कमाई भी इनकम है, लेकिन कई राइडर्स पर टैक्स बनता ही नहीं। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में नई टैक्स व्यवस्था (new regime) वाले भारतीय निवासी को ₹60,000 तक की छूट (रिबेट) मिलती है, अगर कुल टैक्सेबल इनकम ₹12,00,000 तक है। पुरानी व्यवस्था में ₹5,00,000 तक की इनकम पर ₹12,500 तक की छूट है। अगर आपके पेमेंट से TDS कटा है, तो उसे वापस पाने के लिए रिटर्न ज़रूर भरें।
क्या कानून डिलीवरी पार्टनर्स को कोई सामाजिक सुरक्षा देता है?
हां, कानून में इसका इंतज़ाम है। Code on Social Security, 2020 (सामाजिक सुरक्षा संहिता) 21.11.2025 से लागू है। इसमें पहली बार "गिग वर्कर" और "प्लेटफ़ॉर्म वर्कर" की परिभाषा दी गई है, और सरकार इनके लिए योजनाएं बना सकती है: जीवन और विकलांगता कवर, एक्सीडेंट बीमा, हेल्थ और मैटरनिटी फ़ायदे, और बुढ़ापे की सुरक्षा। प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों (एग्रीगेटर) को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% एक Social Security Fund में देना होगा, जो गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स को दिए गए पेमेंट के 5% से ज़्यादा नहीं होगा। इसी फ़ंड से योजनाओं का खर्च चलता है; यह पैसा आपकी कमाई से नहीं कटता।
क्या मुझे ई-श्रम पर रजिस्टर करना चाहिए, और कौन कर सकता है?
ई-श्रम (e-Shram) असंगठित मज़दूरों का सरकारी डेटाबेस है, जिसमें गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर भी आते हैं। रजिस्टर करने पर 12 अंकों का UAN नंबर मिलता है, जो कभी नहीं बदलता। सरकार के मुताबिक आधार से जुड़ी इस ID से आपके सामाजिक सुरक्षा फ़ायदे आपके साथ रहते हैं, चाहे आप प्लेटफ़ॉर्म बदलें या एक साथ कई पर काम करें। अगर आप असंगठित काम करते हैं, उम्र 16 से 59 साल है, और आप EPFO या ESIC के मेंबर नहीं हैं, तो रजिस्टर कर सकते हैं; कमाई की कोई सीमा नहीं है। ज़रूरत है आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर की। मोबाइल लिंक नहीं है तो नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर अंगूठा लगाकर रजिस्टर करा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन मुफ़्त है। हेल्पडेस्क: 14434।
क्या डिलीवरी पार्टनर्स को आयुष्मान भारत हेल्थ कवर मिल सकता है?
केंद्र सरकार के बजट 2025-26 में प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स के लिए तीन बातें घोषित हुईं: ई-श्रम पर रजिस्ट्रेशन, पहचान पत्र, और आयुष्मान भारत PM-JAY के तहत हेल्थ कवर। PM-JAY में हर परिवार को साल में ₹5 लाख तक का अस्पताल इलाज कवर मिलता है, 31,000 से ज़्यादा सरकारी और प्राइवेट सूचीबद्ध अस्पतालों में। श्रम मंत्रालय ने कहा है कि इस फ़ायदे के लिए पहले ई-श्रम पर रजिस्टर करें। जनवरी 2026 में मंत्रालय ने बताया कि ई-श्रम और PM-JAY का डेटा आपस में जोड़ दिया गया है।
क्या दिल्ली सरकार गिग वर्कर्स के लिए कुछ कर रही है?
दिल्ली सरकार ने अपने 2026-27 के बजट (मार्च 2026) में अटल कैंटीन पर गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट रूम बनाने की घोषणा की, जहां राइडर्स खाना खा सकें और फ़ोन चार्ज कर सकें। साथ ही कहा कि गिग वर्कर्स वेलफ़ेयर बोर्ड जल्द से जल्द बनाया जाएगा। उस समय ये सिर्फ़ घोषणाएं थीं जिन पर काम चल रहा था, और गिग वर्कर्स की एक यूनियन ने कहा कि दिल्ली में गिग वर्कर्स के लिए अभी कोई साफ़ कानून नहीं है।
क्या हर हफ़्ते एक जैसी कमाई होती है?
नहीं। ज़्यादातर कंपनियाँ हर ऑर्डर या हर काम का पैसा देती हैं, इसलिए हफ़्ते की कमाई ऑर्डर, घंटों, इंसेंटिव और कटौती के साथ बदलती रहती है। जैसे Zepto कहता है कि उसकी फ़ीस दूरी, समय, डिमांड, ट्रैफ़िक, मौसम और कस्टमर रेटिंग से तय होती है।
पेमेंट आने से पहले कमाई कहाँ देखें?
Swiggy Instamart के मुताबिक ऑर्डर की कमाई, इंसेंटिव और बोनस ऐप में रोज़ दिखते हैं। Porter के पार्टनर ऐप में रोज़ की कमाई और हफ़्ते का पेआउट दिखता है। Amazon Flex में हर ब्लॉक के ऑफ़र पर अनुमानित कमाई लिखी होती है।

डिलीवरी जॉब के लिए अप्लाई करें

नाम, फ़ोन और इलाके वाला छोटा-सा फ़ॉर्म भरें। हमारी टीम आपको वापस कॉल करेगी।

डिलीवरी जॉब के लिए अप्लाई करें

आवेदन बिल्कुल मुफ़्त है। हम कभी कोई फ़ीस नहीं लेते।