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दिल्ली में फ़र्ज़ी डिलीवरी जॉब से कैसे बचें

दिल्ली में फ़र्ज़ी रिक्रूटर बड़ी डिलीवरी कंपनियों का नाम लेकर नौकरी ढूंढने वालों से पैसे ऐंठते हैं। सब कुछ असली जैसा दिखता है: जॉब का ऐड, "HR" वाला फ़ोन, यहाँ तक कि ऑफ़िस में इंटरव्यू भी। बचने का सीधा नियम एक ही है: नौकरी का वादा करने वाले किसी को पैसे न दें।

दिल्ली के फुटपाथ पर परेशान युवक अपना फ़ोन देख रहा है, पीछे से एक डिलीवरी राइडर गुज़र रहा है

इन बातों पर तुरंत चौकन्ने हो जाएं

इनमें से कुछ भी दिखे तो रुकें और सोचें:

  • काम मिलने से पहले ही पैसे मांगे जाएं: रजिस्ट्रेशन, वेरिफ़िकेशन, प्रोसेसिंग, एग्रीमेंट या TDS के नाम पर।
  • कहा जाए कि जॉइन करने के बाद पैसा वापस मिल जाएगा।
  • आपके बैंक की डिटेल मांगी जाए।
  • उनके भेजे QR कोड या लिंक से पेमेंट करने को कहा जाए।
  • UPI ऐप में पैसे लेने वाले का नाम किसी कंपनी का नहीं, किसी आदमी का दिखे।
  • WhatsApp या Telegram पर कोई अनजान व्यक्ति बात करे।
  • ईमेल कंपनी के पते से नहीं, किसी फ़्री ईमेल पते से आए।
  • ऑफ़र इतना अच्छा लगे कि यकीन न हो।

धोखा आम तौर पर ऐसे चलता है

दिल्ली पुलिस के पकड़े मामलों में तरीका लगभग एक जैसा था:

  1. जॉब पोर्टल, सोशल मीडिया या YouTube पर अच्छी नौकरी का ऐड आता है।
  2. कोई खुद को "HR" बताकर WhatsApp या फ़ोन पर बात करता है।
  3. इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, कभी-कभी असली ऑफ़िस में।
  4. बताया जाता है कि आप सेलेक्ट हो गए।
  5. फिर एक के बाद एक फीस मांगी जाती है।
  6. पैसे देना बंद करें तो ब्लॉक कर देते हैं या नंबर बंद हो जाता है।

जून 2025 में दिल्ली के एक 19 साल के लड़के ने इसी तरह दस दिन में ₹9,000 गंवा दिए। धोखेबाज़ों ने लोगों को फंसाने के लिए Zepto का नाम इस्तेमाल किया था, जबकि Zepto का इससे कोई लेना-देना नहीं था। पुलिस को उनके पास 100 से ज़्यादा रिज़्यूमे और आधार कार्ड मिले। अगस्त 2026 में उत्तम नगर के एक फ़र्ज़ी प्लेसमेंट ऑफ़िस ने दिखावे के इंटरव्यू के बाद लोगों से ₹3,000 से ₹4,000 मांगे।

ऑफ़िस हो या किसी बड़ी कंपनी का नाम, इससे ये साबित नहीं होता कि नौकरी असली है।

"घर बैठे जॉब" वाले टास्क

एक और आम जाल डिलीवरी का काम है ही नहीं। ऐड में घर बैठे आसान पार्ट-टाइम काम का लालच होता है। फिर WhatsApp या Telegram पर एजेंट वीडियो लाइक करने या मैप पर रेटिंग देने जैसे टास्क देता है। शुरू में थोड़ा कमीशन मिलता है। फिर ज़्यादा कमाई के नाम पर पैसा लगवाया जाता है, और वो पैसा डूब जाता है।

डिलीवरी का असली काम है: गाड़ी चलाना, ऑर्डर उठाना और पहुँचाना। वीडियो लाइक करने के पैसे कोई नहीं देता।

कुछ भी करने से पहले जांच लें

  1. नौकरी का वादा करने वाले किसी को पैसे न भेजें। सरकार की नेशनल करियर सर्विस (NCS) भी कहती है कि नौकरी ढूंढने वाले एम्प्लॉयर को फीस न दें।
  2. किसी के भेजे लिंक या QR कोड से पेमेंट न करें।
  3. बिना जांचे किसी एजेंट को अपना आधार कार्ड या दूसरे डॉक्यूमेंट न दें।
  4. कोई खुद को NCS से बताए, तो NCS की हेल्पलाइन 1514 पर पूछकर पक्का करें।
  5. शक वाली जॉब कॉल आई, पैसा भले न गया हो? संचार साथी पर शिकायत करें।

कुछ डिलीवरी कंपनियों की अपनी ऑनबोर्डिंग फीस होती है। वो क्या कहती हैं और धोखे से कैसे अलग है, ये हमारी जॉइनिंग फीस गाइड में पढ़ें।

पैसे दे चुके हैं तो क्या करें

देर न करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकने की उम्मीद उतनी ज़्यादा।

  1. नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  2. या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  3. चैट, कॉल और पेमेंट की रसीद के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
  4. वो कुछ भी वादा करें, और पैसे न दें।

इस साइट पर अप्लाई कैसे होता है

यहाँ अप्लाई करने का एक ही तरीका है: हमारा फ़ॉर्म भरें, जिसमें नाम, फ़ोन, शहर और इलाका लिखना है। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपनिंग के बारे में बात करती है। हम एक अलग, स्वतंत्र साइट हैं, डिलीवरी कंपनियाँ खुद नहीं।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या डिलीवरी जॉब पाने के लिए पैसे देने चाहिए?
नहीं। श्रम और रोज़गार मंत्रालय की नेशनल करियर सर्विस (NCS) साफ़ कहती है कि नौकरी ढूंढने वालों को एम्प्लॉयर को कोई फीस नहीं देनी चाहिए। दिल्ली पुलिस की सलाह भी यही है: प्लेसमेंट एजेंसी की जांच किए बिना रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग या अकाउंट खोलने के नाम पर पैसे न दें। अगर कोई जॉब से पहले पैसे मांगे, तो इसे खतरे का संकेत समझें।
फ़र्ज़ी जॉब ऑफ़र को कैसे पहचानें?
दूरसंचार विभाग (DoT) के मुताबिक फ़र्ज़ी जॉब कॉल के ये संकेत हैं: कॉल करने वाला पैसे या आपके बैंक की डिटेल मांगे, और ईमेल किसी फ्री या गैर-सरकारी/गैर-कंपनी ईमेल पते से आए। DoT कहता है: जो ऑफ़र ज़रूरत से ज़्यादा अच्छा लगे, वो अक्सर धोखा होता है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की सलाह: WhatsApp या Telegram पर कोई अनजान व्यक्ति संपर्क करे तो बिना जांचे पैसे न भेजें। UPI ऐप में पैसे लेने वाले का नाम ज़रूर देखें। अगर पैसा किसी अनजान आदमी के खाते में जा रहा है, तो स्कीम फ़र्ज़ी हो सकती है।
दिल्ली में हाल का एक फ़र्ज़ी जॉब रैकेट कैसे काम करता था?
अगस्त 2026 में IANS ने खबर दी कि दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने ने उत्तम नगर में एक फ़र्ज़ी प्लेसमेंट एजेंसी पकड़ी। ये लोग ऑनलाइन जॉब पोर्टल पर अच्छी-अच्छी वैकेंसी डालते थे, फिर खुद को HR बताकर WhatsApp और फ़ोन पर संपर्क करते थे। ऑफ़िस में दिखावे का इंटरव्यू होता, कहा जाता कि आप सेलेक्ट हो गए, और फिर रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग या अकाउंट खोलने के नाम पर ₹3,000 से ₹4,000 लिए जाते थे। कहते थे कि जॉइन करने के बाद पैसा वापस मिल जाएगा। न नौकरी मिली, न पैसा लौटा, और उनके नंबर बंद हो गए।
क्या धोखेबाज़ डिलीवरी कंपनियों का नाम इस्तेमाल करते हैं?
हां। जून 2025 में IANS ने बताया कि दिल्ली के शाहदरा साइबर थाने ने एक ऐसा रैकेट पकड़ा जो Zepto जैसी बड़ी कंपनियों में नौकरी का झांसा देता था। 19 साल के एक लड़के ने YouTube पर एक जॉब ऐप का ऐड देखा और कैशियर की जॉब के लिए अप्लाई किया। फिर खुद को HR बताने वाले एक आदमी ने उसे निर्माण विहार में वॉक-इन इंटरव्यू के लिए बुलाया। दस दिन में रजिस्ट्रेशन, वेरिफ़िकेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे ₹9,000 ले लिए गए, और जब उसने और पैसे देने से मना किया तो उसे ब्लॉक कर दिया। पुलिस को इनके पास से 100 से ज़्यादा रिज़्यूमे और आधार कार्ड मिले। इसमें Zepto का कोई हाथ नहीं था: सिर्फ़ उसका नाम चारे की तरह इस्तेमाल हुआ।
जॉब ऑफ़र पर आगे बढ़ने से पहले दिल्ली पुलिस क्या सलाह देती है?
दिल्ली पुलिस (शाहदरा) की अपील है कि ऑनलाइन जॉब फ्रॉड से सावधान रहें: जॉब ऑफ़र, भर्ती एजेंसी और पैसे की हर मांग पहले अच्छी तरह जांच लें। किसी अनजान लिंक या QR कोड पर पैसे न भेजें। कुछ भी गड़बड़ लगे तो साइबर पुलिस हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
WhatsApp या Telegram पर वीडियो लाइक करने वाली "पार्ट-टाइम जॉब" असली होती है?
बहुत सावधान रहें। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) एक आम धोखे के बारे में बताता है: "घर बैठे जॉब" जैसे शब्दों वाले ऑनलाइन ऐड पार्ट-टाइम काम ढूंढ रहे बेरोज़गार युवाओं को निशाना बनाते हैं। फिर WhatsApp या Telegram पर कोई एजेंट वीडियो लाइक करने या मैप पर रेटिंग देने जैसे टास्क देता है। शुरू में थोड़ा कमीशन मिलता है, फिर ज़्यादा कमाई के लालच में और पैसा लगाने को कहा जाता है। जैसे ही आप बड़ी रकम डालते हैं, वो फ़्रीज़ हो जाती है और पैसा डूब जाता है। I4C की सलाह है कि अनजान लोगों को बिना जांचे पैसे न भेजें।
मैंने फ़र्ज़ी जॉब वाले को पैसे दे दिए। अब क्या करूं?
जल्दी से जल्दी शिकायत करें। नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। सरकार के मुताबिक 1930 हेल्पलाइन ऑनलाइन पैसों के धोखे में फंसे लोगों की तुरंत मदद करती है: जल्दी रिपोर्ट होने पर, जहां मुमकिन हो, धोखे वाला ट्रांज़ैक्शन रोका (फ़्रीज़) जा सकता है।
संदिग्ध जॉब कॉल आई, पर पैसे नहीं दिए। क्या फिर भी शिकायत कर सकते हैं?
हां। दूरसंचार विभाग (DoT) कहता है कि शक वाली फ्रॉड कॉल की शिकायत संचार साथी पर करें (sancharsaathi.gov.in या संचार साथी ऐप)। अगर पैसा जा चुका है, तो cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या 1930 पर कॉल करें। अगर कोई खुद को सरकार की नेशनल करियर सर्विस (NCS) से बताए, तो NCS के टोल-फ्री हेल्पलाइन 1514 पर पूछकर पक्का कर लें।
इंटरव्यू असली ऑफ़िस में हुआ था। फिर भी धोखा हो सकता है?
हाँ। इस पेज पर दिल्ली के जिन दो मामलों की बात है, दोनों में लोगों को ऑफ़िस में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था: एक निर्माण विहार में, एक उत्तम नगर में। सेलेक्ट होने की खबर के बाद ही फीस मांगी गई।

डिलीवरी जॉब के लिए अप्लाई करें

नाम, फ़ोन और इलाके वाला छोटा-सा फ़ॉर्म भरें। हमारी टीम आपको वापस कॉल करेगी।

डिलीवरी जॉब के लिए अप्लाई करें

आवेदन बिल्कुल मुफ़्त है। हम कभी कोई फ़ीस नहीं लेते।